Tuesday, December 14, 2010

हमारे द्वारा सतवास के आसपास के गांवों में बाल मेला करने की प्रक्रि‍या में बच्‍चों को जोडना

दिनांक 30/10/2010 को इकलेरा में माध्यमिक शाला में बाल मेले के आयोजन किया गया जिसमें लगभग 100 बच्चों ने भाग लिया। बाल मेला सुबह 8 बजे से शुरू हुआ था।  बाल मेले में स्रोत व्यक्ति एकलव्य से रवी भाई ,दिनेष पटेल ,दिपाली , प्रेम मनमोजी ,इमरान खान , समावेष से शाकिर पठान ,गजानंद यादव , और पहचान से आरिफ खान ,सादिक खान थे। बाल मेले में 6 गतिविधियां रखी गई ओरीगेमी ,विज्ञान के खेल,चि़त्र कला , पत्तियों का जादू ,मैदानी खैल , पुस्तकालय बाल मेले में बच्चों के साथ एक बड़ा गोला बनाया जिसमें सभी को बाल मेले के बारे में शाकिर भाई ने बताया कि हम क्या करेगें। इसके बाद आरिफ और इमरान ने बच्चों को गीत कराया के बोल थें पहाड़ी पे पेड़ था और मेरे घर मे चोर आया  इसके बाद सभी बच्चों को 6 समूह में बाटा हर समूह का एक नाम था । अमलताष , पलाष ,मोगरा ,गुलाब, गेंदा ,गुलमोहर इन समुहों में बच्चों को बाटने के बाद सभी को अलग अलग कार्नर मेें भेजा गया जहां उन्हे गतिविधियां सीखना था। आज सभी बच्चों को बहुत अच्छा लग रहा था । सभी अलग अलग समूहों मे जाकर काम कर रहे थे एक कार्नर में एक समूह को लगभग 30 मिनिट का समय दिया जाता था। जब बच्चों को टोपी बनाना सीखाया तो सभी बच्चों ने अपने अपने सर पर अपनी टोपी लगा ली दूसरे बच्चों ने कहा हम कब उस कार्नर में जाऐगें और किसी ने कागज पर रंगीन चित्र बनाऐ किसी ने पत्तियों से जानवरो के चित्र बनाऐं बाल मेले के दौरान गांव के कुछ लोग भी वहां देखने आऐ और चित्र भी बनाऐं । हमारा काम आज 12 बजे तक चला जिसमें सभी बच्चों को सब सीखने का मौका मिला है। इसके बाद हम लोगों ने षिक्षकों के साथ चर्चा की जिसमें षिक्षकों ने कहा की आज कार्यक्रम बहुत ही मजेदार रहा और हम चाहतें हैं। कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के साथ यहां हमेषा होते रहें इसके बाद रवी भाई ने कहा की हम अपने साथ कुछ किताबें लाऐं है हम चाहते हैं कि बच्चों को यहां कहानी कि रोचक किताबें पढ़ने का मौका मिले और किताबों कि दूनिया के माध्यम से बच्चों को दूनिया के बारे में पता चले अगर आप लोग हमारी मदद करे तो हम यहां 15 दिन में एक बार आकर बच्चों के साथ किताबों पर काम कर सकतें है हम इसके अलावा बच्चों को अन्य गतिविधियां भी कराऐंगे इस पर षिक्षकों ने सहमति जाताई इस काम के लिए आरिफ का वहां का समय और दिन तय किया शनिवार जो कि माह का दूसरा और आखिर होगा । इस काम में आरिफ कि मदद के लिए समय समय पर अन्य साथी आतें रहेगें। और हम लोगों ने स्कूल से एक पेटी भी मांगी जिसमें हम अपनी किताबें व गतिविधि की समाग्री रख सकें जो हमें स्कूल ने उपलब्ध कराई । इस काम को अभी हम आगामी 4 माह के लिए करके देख रहे हैं। अगर इसके बाद हमें जरूरत लगी तो हम इस काम को आगे बढ़ाते हुए नया कोई प्लान बनाऐगें ताकि काम को लम्बे समय तक सुचारू रूप से चलाया जा सके इस पर भी सभी साथियों ने अपनी सहमती जताई इस काम में समावेष और पहचान के साथी लगातार मदद करते रहेगें औार काम का अवलोकन व मार्गदषन भी करते रहेगें।
                                        इमरान खान

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