क्या कभी सपने सच होते हे ये सवाल एक बच्चे ने पूछा तो में सोच में पद गया उसने कहा अगर एसा होता तो हम आजाद होते समाज के बन्धनों से और खेलते अपने उन साथियों के साथ जो समाज की नजर में अछूत हे क्या कभी एसा होगा की हम अपने जेसे उन सारे लोगो को जो बरसो से पीड़ित और शोषित हे अपना कह सकेगे क्या कभी कोई अपनी मर्जी से शादी करके जिन्दा रह पायेगा एस बर्बर समाज में उन्हें जीने का अधिकार मिलेगा
पर जब में देखता हु की हमरे यहाँ जो लोग भूक से मर रहे हे और लगातार आत्मदाह कर रहे हे उन्हें यह कहकर लज्जित कीया जाता हे की वो अपने पिछले पापो की सजा भुगत रहे हे क्या गरीब लोग ही पाप करते हे अगर पापो की सजा मिलती हे तो उस आदमी को कब मिलेगी जिसने समाज को अलग अलग तबको में बात दिया हे
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