सतवास में चकमक क्लब 12 सालों तक चलता रहा इसमें संसाधनो में मदद एकलव्य द्वारा की जाती थी। बाद में इसे समावेश द्वारा संचालित किया जाने लगा। यहां स्रोत बच्चे चकमक क्लब की व्यवस्था को संचालित करते थे। हम कह सकतें है कि यह जगह बच्चों की अपनी जगह होती थी,कब बालमेले होगें ,कौन सी गतिविधियां होगीं, कैसे हम अपने काम को करेंगें और कौन समनवयक होगा यह सब एक लोकतांत्रिक तरीके से बच्चे ही तय करते थे। यह चित्र 1995 के बाल मेले का है। शा.प्रा.शाला.सतवास
Saturday, November 27, 2010
BalmeLa program
साथियों हमारे द्वारा इकलेरा माध्यमिक शाला में बच्चों के साथ बाल मेला कार्यक्रम कर रहे है। ताकि वहां के बच्चों को स्रोत बच्चों की भूमिका में हम देख सके और उनके माध्यम से स्कूल में पुस्तकालय संचालन का काम को कर सकें हम सतवास और आस पास के अन्य स्कूलों मे लगातार इस तरह के प्रयास कर रहें है। और बच्चों के अन्दर छुपे कौशलों के विकास और स्वतंत्र रूप से संगठित होकर समूह में काम करने नैत्रतव क्षमता के विकास को बढाना हमारे काम का मुख्य उदेश्य है। इस काम में काफी उर्जा की जरूरत है जो हमें समय समय पर अपने साथियों के मार्ग दर्शन से मिल जाती है। हम चकमक क्लब जैसी जगह हर शहर हर गांव में स्थापित करना चाहते है ताकि बच्चों को खुद कि क्षमताओं का विकास करने के सहज अवसर मिलते रहे है। समाज में लोगों का विज्ञानिक द्रष्िटकोण बने और सभी को समानता के साथ काम के अवसर मिले हम समाज भी बनाऐगें आदमी को डूडते हुऐ एसा हमारा मानना है।
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