सतवास में चकमक क्लब 12 सालों तक चलता रहा इसमें संसाधनो में मदद एकलव्य द्वारा की जाती थी। बाद में इसे समावेश द्वारा संचालित किया जाने लगा। यहां स्रोत बच्चे चकमक क्लब की व्यवस्था को संचालित करते थे। हम कह सकतें है कि यह जगह बच्चों की अपनी जगह होती थी,कब बालमेले होगें ,कौन सी गतिविधियां होगीं, कैसे हम अपने काम को करेंगें और कौन समनवयक होगा यह सब एक लोकतांत्रिक तरीके से बच्चे ही तय करते थे।
यह चित्र 1995 के बाल मेले का है। शा.प्रा.शाला.सतवास
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