चकमक क्‍लब

सतवास में चकमक क्‍लब 12 सालों तक चलता रहा इसमें संसाधनो में मदद एकलव्‍य द्वारा की जाती थी। बाद में इसे समावेश द्वारा संचालि‍त कि‍या जाने लगा। यहां स्रोत बच्‍चे चकमक क्‍लब की व्‍यवस्‍था को संचालि‍त करते थे। हम कह सकतें है कि‍ यह जगह बच्‍चों की अपनी जगह होती थी,कब बालमेले होगें ,कौन सी गतिवि‍धि‍यां होगीं, कैसे हम अपने काम को करेंगें और कौन समनवयक होगा यह सब एक लोकतांत्रि‍क तरीके से बच्‍चे ही तय करते थे। यह चि‍त्र 1995 के बाल मेले का है। शा.प्रा.शाला.सतवास

Wednesday, January 12, 2011

चकमक क्‍लब: ham our wo

http://chakmakclub.blogspot.com/ चकमक क्‍लब: ham our wo
Posted by PAHCHAN at 9:39 PM
Email ThisBlogThis!Share to XShare to FacebookShare to Pinterest

No comments:

Post a Comment

Newer Post Older Post Home

Popular Posts

  • सुनि‍ल के अनुभव चकमक क्‍लब को लेकर
    जहां सबका सम्मान होता है                    -सुनील बागवान     नये कपड़े पहने हुए हो, सर में तेल डाला हो, नाजुक हो, गोरा रंग और मृदुभाषी हो.....
  • हम चाहते है समाज में बदलाव
    हम अक्‍सर सोचतें हैं कि‍ समाज में बदलाव कैसे लाऐं पर हमने कभी समाजि‍करण की प्रक्रि‍या को अदलने की बात मन में नहीं आने दी क्‍योकि‍ इस प्रक्रि...
  • हमारे द्वारा सतवास के आसपास के गांवों में बाल मेला करने की प्रक्रि‍या में बच्‍चों को जोडना
    दिनांक 30/10/2010 को इकलेरा में माध्यमिक शाला में बाल मेले के आयोजन किया गया जिसमें लगभग 100 बच्चों ने भाग लिया। बाल मेला सुबह 8 बजे से शुरू...
  • चकमक क्‍लब
    http://chakmakc lub.blogspot.co m/ चकमक क्‍लब
  • चकमक क्‍लब की अवधारणा
    चकमक क्लब की अवधारणा भूमिका- हमारे समाज का ताना बाना इस तरह का है जिसमें बच्चों को एक खास तरह की वंचितता में अपना बचपन बिताना होता है। यह व...
  • ये तो ऐसे ही हैं ? - चन्दन यादव
    ये तो ऐसे ही हैं ? - चन्दन यादव                                                             सरकारी स्कूलों में जब किसी बच्चे से अपेक्षित क...
  • (no title)
    पाठयपुस्तकें बनीं हिन्दुत्व के प्रसार का जरिया                                                               अगर पढ़ने लिखने सोचने और अभिव...
  • hamri pahal jaroori he
    हम सोचते हे की हम जो कुछ कर रहे हे वो दुसरो के लिए कर रहे हे ! पर यह धरना अपने मन को समझने के लिए मात्र हे
  • (no title)
     मुखोटा हरदा से आये अब्दुल कलाम बच्चो को गीत करते हुए पेपर मेसी से मुखोटे बनाते   कार्यशाला में लगभग ३० लडकियों ने भागीदारी ...
  • ham our wo
    क्या कभी सपने सच होते हे ये सवाल एक बच्चे ने पूछा तो में सोच में पद गया उसने कहा अगर एसा होता तो हम आजाद होते समाज के बन्धनों से और खेलते अप...

Followers

हम भी सीखना चाहते है।

हम भी सीखना चाहते है।

हमारे अपने

हमारे अपने
मैं क्‍या पढ पाउंगा

Search This Blog

Watermark theme. Theme images by duncan1890. Powered by Blogger.

हम लोगों ने सतवास में कैसे की चकमक क्‍लब की नई शुरूआत

हम सभी चकमक क्‍लब से नि‍कले साथि‍यों का मानना था कि‍ चकमक क्‍लब ने हमारी सोच में सकारात्‍मक प्रभाव डाला है हम अग समाज में बराबरी की बातें करतें है । और हमारे समाजि‍करण में जो चकमक क्‍लब का योगदान था । वह महत्‍वपूर्ण रहा है। चूकि‍ पि‍छले कुछ सालों से सतवास में चकमक क्‍लब बंद हो गया है। इससे बच्‍चों को अपने लि‍ए एक खुला मंच नहीं मि‍ल पा रहा है। हम सभी साथि‍यों को लगा की सतवास और आस पास के गांव यह व्‍यवस्‍था फि‍र से शुरू होना चाहि‍ए । हम लोगों ने जून 2009 से सतवास में चकमक क्‍लब की शुरूआत फि‍र से की इस काम में हम सभी जगह से चंदा लेते है और वहां की व्‍यवस्‍था को चलातें है हम और लोगों से भी लगातार आग्रह करते आऐं है की वो हमारे साथ इस काम में मदद करें । इस प्रयास में हमने लागों को मेल भी कि‍ये और कुछ जगह से सकारात्‍मक जवाब भी मि‍ले है। हम इस काम को कैसे आगे बढाऐ और क्‍या इसमें जोडे यह आप लोगों के सुझाव पर भी तय कि‍या जा सकता है ।

चकमक क्‍लब की अवधारणा

  • सुनि‍ल के अनुभव चकमक क्‍लब को लेकर
    जहां सबका सम्मान होता है                    -सुनील बागवान     नये कपड़े पहने हुए हो, सर में तेल डाला हो, नाजुक हो, गोरा रंग और मृदुभाषी हो.....
  • हम चाहते है समाज में बदलाव
    हम अक्‍सर सोचतें हैं कि‍ समाज में बदलाव कैसे लाऐं पर हमने कभी समाजि‍करण की प्रक्रि‍या को अदलने की बात मन में नहीं आने दी क्‍योकि‍ इस प्रक्रि...
  • हमारे द्वारा सतवास के आसपास के गांवों में बाल मेला करने की प्रक्रि‍या में बच्‍चों को जोडना
    दिनांक 30/10/2010 को इकलेरा में माध्यमिक शाला में बाल मेले के आयोजन किया गया जिसमें लगभग 100 बच्चों ने भाग लिया। बाल मेला सुबह 8 बजे से शुरू...
  • चकमक क्‍लब
    http://chakmakc lub.blogspot.co m/ चकमक क्‍लब
  • चकमक क्‍लब की अवधारणा
    चकमक क्लब की अवधारणा भूमिका- हमारे समाज का ताना बाना इस तरह का है जिसमें बच्चों को एक खास तरह की वंचितता में अपना बचपन बिताना होता है। यह व...
  • ये तो ऐसे ही हैं ? - चन्दन यादव
    ये तो ऐसे ही हैं ? - चन्दन यादव                                                             सरकारी स्कूलों में जब किसी बच्चे से अपेक्षित क...
  • (no title)
    पाठयपुस्तकें बनीं हिन्दुत्व के प्रसार का जरिया                                                               अगर पढ़ने लिखने सोचने और अभिव...
  • hamri pahal jaroori he
    हम सोचते हे की हम जो कुछ कर रहे हे वो दुसरो के लिए कर रहे हे ! पर यह धरना अपने मन को समझने के लिए मात्र हे
  • (no title)
     मुखोटा हरदा से आये अब्दुल कलाम बच्चो को गीत करते हुए पेपर मेसी से मुखोटे बनाते   कार्यशाला में लगभग ३० लडकियों ने भागीदारी ...
  • ham our wo
    क्या कभी सपने सच होते हे ये सवाल एक बच्चे ने पूछा तो में सोच में पद गया उसने कहा अगर एसा होता तो हम आजाद होते समाज के बन्धनों से और खेलते अप...